राम इमाम-ए-हिंद हैं, जल्द बने राम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर: भागवत

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) के ‘भविष्य का भारत-राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का दृष्टिकोण’ कार्यक्रम के अंतिम दिन संघ प्रमुख मोहन भागवत ने लोगों के सवालों के जवाब दिए. प्रश्नोत्तर के इस सेशन में भागवत ने कश्मीर से लेकर राम मंदिर, हिंदुत्व, आरक्षण और गोरक्षा तक पर संघ के विचार रखे. पिछले दो दिनों के दौरान 25 विषयों से संबंधित कुल 215 सवाल मिले थे, जिनका संघ प्रमुख ने एक-एक कर जवाब दिया.

राम मंदिर पर अध्यादेश का मामला सरकार के पास है और आयोजन का मामला रामजन्म भूमि मुक्ति संघर्ष समिति के पास है और दोनों में मैं नहीं हूं. आंदोलन में क्या करना है, वह उच्चाधिकार समिति को तय करना है. अगर वह सलाह मांगेगी तो मैं बताउंगा. मैं संघ के नाते चाहता हूं कि राम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर जल्द बनना चाहिए. भगवान राम अपने देश के बहुसंख्य लोगों के लिए भगवान हैं लेकिन वे केवल भगवान नहीं हैं. उनको लोग इमामे हिंद मानते हैं. इसलिए जहां राम जन्मभूमि है वहां मंदिर बनना चाहिए.

इससे पहले मोहन भागवत ने दो दिनों तक संघ के बारे में बताया कि संघ क्या काम करता है, संघ की विचारधारा क्या है, हिंदुत्व क्या है.

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के दिल्ली में ‘भविष्य का भारत: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का दृष्टिकोण’ नामक तीन दिवसीय कार्यक्रम के दूसरे दिन संघ प्रमुख मोहन भागवत संघ और हिंदुत्व के रिश्ते पर अपनी बात रखी. कार्यक्रम के दूसरे दिन मंगलवार को भागवत ने कहा कि हमारा कोई शत्रु नहीं है, न देश में और न ही विदेश में. हां, हम कई लोगों के शत्रु होंगे और उनसे अपने आपको बचाते हुए उन्हें अपने साथ लेकर चलना ही हिंदुत्व है. हम सबका संतुलित और समन्वय विकास करना चाहते हैं. हमारे यहां कहा गया है कि कमाना मुख्य नहीं है, उसको बांटना मुख्य है. हमारे हिंदुत्व के तीन आधार हैं- देशभक्ति, पूर्व गौरव और संस्कृति.